एमसी कमिश्नर की कोर्ट में संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण मामले सुनवाई हुई, कोर्ट ने मस्जिद के दो फ्लोर पर रिप्लाई फाइल करने को कहा।
शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल की राजधानी शिमला के संजौली मस्जिद में हुए अवैध निर्माण मामले में आज नगर निगम (MC) आयुक्त कोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने यह मामला 8 सप्ताह के भीतर निपटाने के आदेश दे रखे हैं। इस वजह से एमसी आयुक्त ने मस्जिद मामले में आज फैसला सुनाया।
एमसी कमिश्नर की कोर्ट ने दो फ्लोर पर भी रिप्लाई फाइल करने के लिए निर्देश दिए हैं। ये निर्देश वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को भी दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई के लिए अलग से सम्मन भेजे जाएंगे। सभी मामलों का रिकॉर्ड जिला अदालत में होने की वजह से आज एमसी कोर्ट में रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
गौरतलब है कि ऊपर की अवैध घोषित 3 मंजिल को लेकर बीते 5 अक्टूबर को निगम कोर्ट फैसला सुना चुका है। तब एमसी आयुक्त ने मस्जिद की तीन मंजिल को 2 महीने के भीतर तोड़ने के आदेश दिए थे। उस दौरान एमसी आयुक्त ने अगली सुनवाई 21 दिसंबर तय की थी। मगर हाईकोर्ट के आदेशों के कारण एमसी आयुक्त को जल्दी सुनवाई बुलानी पड़ी है।
बता दें कि शिमला के लोकल रेजिडेंट ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर मस्जिद मामला जल्द निपटाने की याचिका दायर की थी। इस पर बीते 21 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने एमसी आयुक्त को समयबद्ध केस निपटाने के आदेश दिए थे। वहीं, मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी ने जिला कोर्ट में चुनौती दे रखी है।
शिमला मस्जिद मामला निगम आयुक्त कोर्ट के साथ-साथ जिला अदालत में भी सुना जा रहा है। ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी ने निगम आयुक्त के मस्जिद की तीन मंजिल तोड़ने के आदेशों को चुनौती दे रखी है। इस पर सोमवार को भी जिला अदालत में सुनवाई होनी है। इस दिन वेलफेयर सोसायटी की याचिका की मैंटेनेबिलिटी को लेकर कोर्ट फैसला सकता है।
बता दें कि संजौली मस्जिद के कारण पूरे प्रदेश में बवाल मचा था। शिमला के बाद सोलन, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जिला में भी जगह-जगह मस्जिद मामले में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किए और अवैध रूप से बनी मस्जिदों को गिराने की मांग उठाई। इससे पूरे प्रदेश में माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इस बीच बीते 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी ने खुद नगर निगम आयुक्त से मिलकर अवैध रूप से बनी ऊपर की मंजिल को हटाने की पेशकश की। इसके बाद हिंदू संगठन शांत हुए। निगम आयुक्त के मस्जिद की तीन मंजिल तोड़ने के आदेशों के बाद यह मामला पूरी तरह शांत हो गया।

