
कुल्लू-आदित्य
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की खराहल घाटी के शहीद बालकृष्ण को सम्मान दिलाने के लिए लोगों को आखिरकार सड़कों पर उतरना पड़ा। जिला मुख्यालय कुल्लू में बुधवार को खराहल घाटी की विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और लोगों ने प्रदर्शन किया।
सैकड़ों लोगों ने ढालपुर के रथ मैदान से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मांग पत्र भेजा गया। गाहर पंचायत के प्रधान रोहित वत्स धामी ने कहा कि पूईद गांव के बालकृष्ण दुश्मनों से लोहा लेते समय शहीद हो गए थे। उनकी शहादत को एक साल हो गया है।
अभी तक न तो शहीद का स्मारक बन सका है और न ही अस्पताल, कॉलेज और बस स्टैंड का नामकरण किया गया। सरकार ने इसकी घोषणा की थी, लेकिन ये घोषणाएं धरातल पर उतरी ही नहीं। ऐसे में अब सड़कों पर उतरना पड़ा है।
पूईद पंचायत के प्रधान सर चंद ठाकुर ने कहा कि पिछले एक साल से सरकार और प्रशासन से यह मांग की जा रही है कि कुल्लू में शहीदों की याद में स्मारक बनाया जाए, लेकिन उनकी बात को नहीं सुना जा रहा है। अब ऐसे नहीं चलेगा। अगर सरकार का यही रवैया तो आने वाले दिनों में शहीद के परिजनों के साथ उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनशन किया जाएगा।
इस दौरान जां पंचायत प्रधान विजेंद्र शर्मा, सेउगी पंचायत की प्रधान प्रभा शर्मा, उपप्रधान चुनी नेगी मौजूद रहे।
पिता ने नहीं लिए थे 20 लाख, 16 अगस्त से करेंगे अनशन
शहीद के बालकृष्ण के पिता महेंद्र सिंह ने दोटूक कहा कि जब तक शहीद स्मारक नहीं बनाया जाता है। तब आंदोलन जारी रखा जाएगा। सरकार ने अस्पताल, कॉलेज और बस स्टैंड का नामकरण बालकृष्ण के नाम से करने की घोषणा की थी। कोई भी घोषणा पूरी नहीं हो सकी है।
सरकार और जिला प्रशासन को 15 अगस्त तक का समय दिया है। इसके बाद वे उपायुक्त कार्यालय के बाहर अनशन करेंगे। महेंद्र सिंह ने कहा कि 15 दिसंबर 2020 को उन्हें एक पत्र मिला। इसमें 20 लाख की मदद देने की बात थी। एसडीएम सदर और तहसीलदार ने उनके घर पर उन्हें यह राशि देनी चाही, लेकिन उन्होंने राशि नहीं ली।
जम्मू के कुपवाड़ा में शहीद हुई थे बालकृष्ण
शहीद सैन्य जवान बालकृष्ण (25) खराहल घाटी के पूईद गांव के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में बालकृष्ण 5 अप्रैल 2020 को शहीद हो गए थे। सरकार और प्रशासन की ओर से आश्वासन ही मिलते रहे।
परिजनों ने खुद बनवाई थी शहीद बेटे की प्रतिमा
आखिर में परिवार के लोगों ने अपने ही घर में शहीद की प्रतिमा बनाई। सरकार शहीद को सम्मान देना भूल गई। पिछली बार कुल्लू दौरे पर आए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ध्यान में भी मामला लाया गया। अब तक कुछ नहीं हुआ।
