हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। जिले की दुर्गम पंचायत टेपा में हुई भारी बर्फबारी ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि लोगों के हौसलों की भी कड़ी परीक्षा ले रही है।
यहां करीब 4 फुट तक बर्फबारी दर्ज की गई है। लेकिन, इस हाड़ जमा देने वाली ठंड और सफेद आफत के बीच इंसानियत की एक ऐसी गर्माहट महसूस हुई है, जिसने साबित कर दिया कि पहाड़ के लोगों का दिल भी पहाड़ जैसा बड़ा होता है।
4 फुट बर्फ में फंसी इंजीनियरों की गाड़ी
दरअसल, टेपा पंचायत में बीएसएनएल टावर के मुरम्मत कार्य के लिए बिहार से 2 इंजीनियर आए हुए थे। काम के दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और भारी बर्फबारी शुरू हो गई। बर्फबारी इतनी तेज थी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
देखते ही देखते सड़कें गायब हो गईं और इंजीनियरों की गाड़ी 4 फुट बर्फ और मलबे के नीचे दब गई। अनजान जगह, शून्य से नीचे का तापमान और सिर पर छत न होने के कारण इंजीनियरों की जान पर बन आई थी। उनके पास न रहने का ठिकाना था और न ही खाने का कोई इंतजाम।
ग्रामीण बने देवदूत, घरों में दी पनाह
मुश्किल की इस घड़ी में टेपा के स्थानीय ग्रामीण मददगार बनकर सामने आए। अपनी तमाम दुश्वारियों को दरकिनार करते हुए ग्रामीणों ने इन अनजान मेहमानों को अपने घरों में पनाह दी।
उनके रहने और खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया गया। बिहार से आए इंजीनियरों ने भावुक होते हुए कहा कि यदि स्थानीय लोग मदद का हाथ न बढ़ाते, तो इस जानलेवा ठंड में उनका बचना नामुमकिन था।
6 दिनों से ब्लैकआऊट, दुनिया से कटा संपर्क
बर्फबारी के कारण टेपा और देवीकोठी पंचायतों का संपर्क पूरी तरह से शेष दुनिया से कट गया है। पिछले 6 दिनों से क्षेत्र में बिजली गुल है, जिससे हालात और भी बदतर हो गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण लोग अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं।
क्या कहते हैं पंचायत प्रधान
ग्राम पंचायत टेपा के प्रधान ध्यान सिंह ने स्थिति की गंभीरता को बयां करते हुए कहा किक्षेत्र में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। सड़क और बिजली न होने से हर कोई परेशान है। बिहार से आए दोनों इंजीनियर यहां फंस गए थे, उनकी गाड़ी बर्फ और मलबे में दबी है।
हमने अपने स्तर पर उनके सुरक्षित रहने और खाने की व्यवस्था की है। वे अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन रास्ता बंद है। हमें प्रशासन से जल्द से जल्द मार्ग बहाली की उम्मीद है।

