शिमला – नितिश पठानियां
नियम व विवादों की उधेड़बुन में फंसी 6297 प्री प्राइमरी शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने वीरवार को हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोशन को आउटसोर्सिंग कम्पनियों को काम आवंटित करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही कॉर्पोशन को जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
15 मई के बाद इस प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। प्री नर्सरी कक्षाओं वाले स्कूलों में भर्ती किए जाने वाले शिक्षकों को सरकार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा प्रशिक्षक का पदनाम दिया है।
भर्तियों को लेकर अब कोई विवाद नहीं है। भर्तियों को लेकर कोर्ट ने जो रोक लगाई थी वह हट गई है। इलेक्ट्रॉनिक निगम ने कंपनियों का चयन कर लिया गया है। विभाग ने स्कूलवार ब्यौरा कॉर्पोशन को दे दिया है। कंपनियों के माध्यम से आवेदन मांगे जाएंगे।
दो साल का डिप्लोमा होगा अनिवार्य
इस भर्ती में नर्सरी टीचर एजुकेशन डिप्लोमा, प्री स्कूल एजुकेशन या अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्रोग्राम में दो साल का डिप्लोमा जरूरी है। यह डिप्लोमा नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन से मान्यता प्राप्त संस्थान से हासिल किया हुआ होना चाहिए। आवेदकों के डिप्लोमा और अन्य कागजातों की जांच स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन करेगा। जो भी शिक्षक नियुक्त होंगे,प्रारंभिक शिक्षा विभाग पर उनका कोई दायित्व नहीं होगा।
यह है पात्रता
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के 12वीं कक्षा में 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए। एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए योग्यता अंकों में पांच प्रतिशत की छूट रहेगी। 21 से 45 वर्ष की आयु वाले इसके लिए पात्र होंगे। उम्मीदवारों को वास्तविक हिमाचली होना आवश्यक रहेगा।
जयराम सरकार में शुरू हुई थी प्रक्रिया, विवादों में फंसी रही
पूर्व जयराम सरकार ने इसके लिए सबसे पहले भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। मामला विवादों में उलझ गया। उसके बाद चुनावी आचार संहिता लगने के चलते प्रक्रिया रुक गई। सत्ता परिवर्तन के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन मामला कोर्ट पहुंचा और प्रक्रिया रोकनी पड़ी।
10 हजार होगा पारिश्रमिक, बिना सरकार की अनुमति के नहीं निकाले जा सकेंगे
विद्यालयवार रिक्तियां प्रारंभिक शिक्षा निदेशक निर्धारित करेंगे। करों और सेवा प्रदाता शुल्क सहित 10 हजार का मासिक पारिश्रमिक तय किया गया है। इसमें एजेंसी चार्जेज, जीएसटी, अन्य खर्च भी शामिल हैं।
प्रत्येक जिले में प्राथमिक शिक्षा के उपनिदेशक के समग्र नियंत्रण में रहते हुए प्रशिक्षक स्कूल के सबसे वरिष्ठ शिक्षक की देखरेख में काम करेंगे। सरकार की मंजूरी के बिना किसी भी प्रशिक्षक को वियोजन से मुक्त नहीं किया जा सकेगा। नामांकन भिन्नता या प्रशासनिक कारणों से प्राथमिक शिक्षा निदेशक के परामर्श से ट्रांसफर हो सकेंगे।