क्यों हैं गुरू का ओदा भगवान से ऊंचा

--Advertisement--

Image

आचार्य अँशुल दीक्षित

? *इसलिए जरूरी है जीवन में गुरु का होना* ?

?? *हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा गुरु भक्ति को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पवित्र दिन भी है। भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु को सर्वोपरि माना है। वास्तव में यह दिन गुरु के रूप में ज्ञान की पूजा का है। गुरु का जीवन में उतना ही महत्व है, जितना माता-पिता का।*

?? *माता-पिता के कारण इस संसार में हमारा अस्तित्व होता है। किंतु जन्म के बाद एक सद्गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान और अनुशासन का ऐसा महत्व सिखाता है, जिससे व्यक्ति अपने सतकर्मों और सद्विचारों से जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी अमर हो जाता है। यह अमरत्व गुरु ही दे सकता है। सद्गुरु ने ही भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बना दिया, इसलिए गुरु पूर्णिमा को अनुशासन पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।*

?? *इस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास गुरु ही करता है। जिससे जीवन की कठिन राह को आसान हो जाती है। सार यह है कि गुरु शिष्य के बुरे गुणों को नष्ट कर उसके चरित्र, व्यवहार और जीवन को ऐसे सद्गुणों से भर देता है। जिससे शिष्य का जीवन संसार के लिए एक आदर्श बन जाता है। ऐसे गुरु को ही साक्षात ईश्वर कहा गया है इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।*

क्यों भगवान से ऊंचा हैं गुरु का ओदा । क्यों हैं गुरु पूजन जरूर।

? *गुरु पूजन* ?

? *गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः |*

*गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||*

*ध्यानमूलं गुरुर्मूर्ति पूजामूलं गुरोः पदम् |*

*मंत्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा ||*

*अखंडमंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |*

*तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ||*

*त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव |*

*त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव ||*

*ब्रह्मानंदं परम सुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं |*

*द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्षयम् ||*

*एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधीसाक्षीभूतम् |*

*भावातीतं त्रिगुणरहितं सदगुरुं तं नमामि ||*

?? *ऐसे महिमावान श्री सदगुरुदेव के पावन चरणकमलों का षोड़शोपचार से पूजन करने से साधक-शिष्य का हृदय शीघ्र शुद्ध और उन्नत बन जाता है | मानसपूजा इस प्रकार कर सकते हैं |*

?? *मन ही मन भावना करो कि हम गुरुदेव के श्री चरण धो रहे हैं … सर्वतीर्थों के जल से उनके पादारविन्द को स्नान करा रहे हैं | खूब आदर एवं कृतज्ञतापूर्वक उनके श्रीचरणों में दृष्टि रखकर … श्रीचरणों को प्यार करते हुए उनको नहला रहे हैं … उनके तेजोमय ललाट में शुद्ध चन्दन से तिलक कर रहे हैं … अक्षत चढ़ा रहे हैं … अपने हाथों से बनाई हुई गुलाब के सुन्दर फूलों की सुहावनी माला अर्पित करके अपने हाथ पवित्र कर रहे हैं … पाँच कर्मेन्द्रियों की, पाँच ज्ञानेन्द्रियों की एवं ग्यारहवें मन की चेष्टाएँ गुरुदेव के श्री चरणों में अर्पित कर रहे हैं …*

? *कायेन वाचा मनसेन्द्रियैवा बुध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् |*

*करोमि यद् यद् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि ||*

?? *शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि से अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो जो करते हैं वह सब समर्पित करते हैं | हमारे जो कुछ कर्म हैं, हे गुरुदेव, वे सब आपके श्री चरणों में समर्पित हैं … हमारा कर्त्तापन का भाव, हमारा भोक्तापन का भाव आपके श्रीचरणों में समर्पित है |*

?? *इस प्रकार ब्रह्मवेत्ता सदगुरु की कृपा को, ज्ञान को, आत्मशान्ति को, हृदय में भरते हुए, उनके अमृत वचनों पर अडिग बनते हुए अन्तर्मुख हो जाओ … आनन्दमय बनते जाओ …*

*ॐ आनंद ।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

स्कूल गई छात्रा को डरा धमकाकर मेले में ले गया युवक, फिर की अश्लील हरकत

हिमखबर डेस्क  हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से बेहद शर्मनाक...

अमेरिकी तटरक्षक बल की हिरासत से छूटे हिमाचल के रक्षित चौहान, 20 दिनों बाद बेटे की आवाज सुन भावुक हुए परिजन

हिमखबर डेस्क अमेरिकी तटरक्षक बल ने उत्तरी अटलांटिक महासागर में...

रील के चक्कर में रियल झटका: फोरलेन पर स्टंटबाजी पड़ी महंगी, 18,500 का कटा चालान

हिमखबर डेस्क  सोशल मीडिया की जादुई दुनिया में चंद 'लाइक'...

मौत के मुंह में फंसे इंजीनियराें के लिए देवदूत बने ग्रामीण, 4 फुट बर्फ के बीच ऐसे बचाई जान

हिमखबर डेस्क  हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में कुदरत का...