
कोटला- स्वयंम
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में जो कर्मचारियों द्वारा पुरानी पैंशन बहाली की मांग उठाई है। उसका पुरजोर समर्थन किया जाता है। क्योंकि एक तो आज के समय में सरकारी नौकरी मिलती ही बहुत ही कम लोगों को है।
ऊपर से अनुबंध आधार जैसी योजनाओं के कारण कुछ सेवाकाल कम वेतन भत्तों में बीत जाने एवं देरी से नौकरी मिलने के कारण बहुत कम अवधि तक ही सरकारी नौकरी करने का मौका मिलने से सरकारी कर्मचारी अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं कर पाते हैं और ऊपर से न्यु पैंशन योजना में नाम मात्र राशि मिलने पर सेवानिवृत्त होने उपरांत सरकारी कर्मचारियों को दो वक़्त की रोटी से मोहताज होना पड़ता है।
इन हालातों को मध्य नजर रखते हुए सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति उपरांत एक सम्मानजनक राशि पैंशन के रूप में मिलनी चाहिए। लेकिन इस मांग को लेकर सरकार का तर्क है कि पुरानी पैंशन बहाल करने केलिए सरकार के पास वित्तीय संसाधनों की कमी है और कर्मचारियों का तर्क है कि न्यु पैंशन योजना के अंतर्गत मिलने वाली धनराशि से सेवानिवृत्ति उपरांत जीवन बसर करना अति मुश्किल हो रहा है।
अतः ऐसी परिस्थितियों में बीच का रास्ता निकाल कर इस समस्या के हल हेतु मंथन सरकार और कर्मचारियों को करना चाहिए कि जो पुरानी मूल पैंशन कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन के पचास प्रतिशत के हिसाब से दी जाती है। उस दर को कर्मचारियों के वर्तमान मूल वेतन जोकि अब नया वेतनमान लागू होने से काफी अच्छा हो गया।
उसका चालीसा प्रतिशत मूल पैंशन के रूप में देने का प्रारुप बना कर दोनों पक्षों में सहमति बना कर समस्या को हल करने की पहल की जाए ताकि सरकार का वित्तिय बोझ भी हल्का हो सके और कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति पर पैंशन के रूप में सम्मानजनक राशि मिलने लगे।
