हिमाचल में भांग को व्यावसायिक खेती का दर्जा देने की तैयारी

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ब्यूरो – रिपोर्ट

भांग को व्यावसायिक खेती का दर्जा देने संबंधी मामला राज्य सरकार के पास विचाराधीन है, ऐसे में आने वाले समय में सरकारी स्तर पर इस बारे कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अभी तक भांग की व्यावसायिक खेेती के लिए कोई क्षेत्र चिन्हित नहीं किया गया है और न ही किसी को एनओसी दी गई है और न ही किसी कंपनी को इसके लिए अधिकृत किया गया है।

राज्य सरकार की तरफ से भांग को व्यावसायिक खेती के रूप में मान्यता संबंधी सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श हो चुका है। अब सरकारी स्तर पर इस खेती के नफे-नुक्सान का आकलन किया जा रहा है। साथ ही विधि विभाग भी इसकी कानूनी पेचीदगियों की पड़ताल कर रहा है।

राज्य में 30 हजार बीघा क्षेत्र में पैदा होती है भाग

उल्लेखनीय है कि राज्य में करीब 30 हजार बीघा क्षेत्र में भांग पैदा होती है, जिसे मानसून सीजन के दौरान सरकार को नष्ट करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

भांग और चरस के कारण हिमाचल प्रदेश की बदनामी भी हुई है। विशेषकर प्रदेश के कुल्लू जिले में इस तरह अवैध कारोबार होने के मामले सामने आते रहे हैं, जिसके तार विदेशों तक जुड़े हैं।

भांग के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की तरफ से अब हाइब्रिड भांग के पौधों को उगाने के मामले सामने आए हैं ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके।

भांग की खेती के लाभ 

राज्य में यदि भांग की व्यावसायिक खेती होती है तो इसका उपयोग औषधि के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा भांग के पौधे के रेशे से वस्त्र बनाए जा सकते हैं।

इस क्षेत्र में स्टार्टअप कंपनियां रुचि दिखा सकती हैं, जिससे कपड़ों के अलावा भांग के रेशे से पर्स, चप्पल व कई अन्य चीजें बनाई जा सकती हैं।

भांग की खेती के नुक्सान

राज्य में भांग की खेती को कानूनी मान्यता प्रदान किए जाने से इसकी आड़ में नशे का अवैध कारोबार फल-फूल सकता है। इससे विदेशों से हाइब्रिड बीज लाकर इसे हिमाचल में उगाया जा सकता है।

नशे के कारोबार से जुड़े सरगना इससे लाभ उठा सकते हैं, जिससे युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आ सकती है।

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