एयरपोर्ट विस्थापितों को बसाने के लिए आधी जमीन चिह्नित

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हिमखबर डेस्क

गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों को बसाने के लिए जिला प्रशासन ने भूमि तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विस्थापित होने वाले परिवारों को बसाने के लिए न्यूनतम 40 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। इस कड़ी में प्रशासन ने प्रारंभिक चरण में अलग-अलग ग्राम पंचायतों में करीब 20 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की है।

यह सरकारी भूमि है, जहां पर विस्थापित होने वाले परिवारों को बसाया जाएगा। वहीं, अतिरिक्त 20 हेक्टेयर भूमि की तलाश भी जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में तलाश की जा रही है। ताकि ऐसा कोई परिवार न रहे जिसे भूमि उपलब्ध न होने से दिक्कतों का सामना करना पड़े।

एक से अधिक विवाहित बेटों को भी विस्थापित परिवारों की श्रेणी में लाया जाएगा

गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत अगर किसी परिवार में पति-पत्नी के अलावा विवाहित एक या एक से अधिक बेटे हैं तो उन्हें भी विस्थापित परिवार की श्रेणी में शामिल कर मकान के लिए भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी।

आपदा प्रभावितों की तर्ज पर सात लाख रुपये मुआवजा

प्रदेश सरकार ने बरसात के मौसम में उन आपदा प्रभावितों को सात लाख रुपये गृह अनुदान दिया है, जिनका मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। इसी तर्ज पर गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण योजना के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों को सात-सात लाख रुपये मुआवजा देने पर विचार हो रहा है।

गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण योजना के कारण करीब 28,00 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा 938 मकान और 594 के करीब दुकानें हैं, जो एयरपोर्ट की जद में आएंगे। इसके अलावा कुछ अन्य भवन और दुकानों भी हैं जो सरकारी भूमि पर बने हैं।

ये गांव आएंगे जद में

एयरपोर्ट विस्तारीकरण की जद में विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा के तहत बाग, बल्ला, बरस्वालकड़, भेड़ी, ढुगियारी खास, गगल खास, झिकली इच्छी, मुगरेहड़, सहौड़ा और सनौरा गांव आएंगे। इसके अलावा शाहपुर विधानसभा के तहत रछियालु, जुगेहड़, भड़ोत और कियोड़ी गांव जद में आएंगे।

3110 मीटर होगी हवाई पट्टी

मौजूदा समय में गगल एयरपोर्ट की हवाई पट्टी 13,70 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी है। 2015 में हुए सर्वे के अनुसार हवाई पट्टी 17,00 मीटर होनी थी। इसके बाद सरकार ने दोबारा सर्वे करवाकर हवाई पट्टी को 2050 मीटर करने की योजना बनाई। इसके बाद 24,00 मीटर और अब रनवे को 31,10 मीटर करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे हो चुका है।

हेमराज बैरवा, उपायुक्त कांगड़ा के बोल

एयरपोर्ट विस्तारीकरण की जद में आने वाले परिवारों को उचित मुआवजा और उन्हें अलग जगह पर बसाने की तैयारी चल रही है। फील्ड से आने वाली रिपोर्ट का अध्ययन कर फाइल प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। एयरपोर्ट का विस्तारीकरण प्रदेश सरकार की प्रमुखता में शामिल है।

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