हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अक्टूबर 2027 से आदर्श आचार संहिता लागू होना तय है। राजनीतिक परंपरा के अनुसार, चुनाव से पूर्व के अंतिम 6 माह में लिए गए अधिकांश निर्णय नई सरकार द्वारा पुनः समीक्षा के दायरे में आ जाते हैं।
ऐसे में वर्तमान सरकार के पास वास्तविक रूप से केवल 11 महीने शेष हैं जिनमें वह जमीनी स्तर पर कार्य करके जनता और कर्मचारियों के बीच अपना विश्वास दोबारा स्थापित कर सकती है।
यही 11 महीने सुखविंदर सिंह सुखु सरकार के भविष्य का निर्धारण करेंगे।
हिमाचल की राजनीति में सरकारी व आउटसोर्स कर्मचारी सदैव निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। 2022 के चुनाव में OPS मुद्दा सरकार परिवर्तन का मुख्य कारण बना, और अब 2027 के चुनाव में माना जा रहा है कि आउटसोर्स कर्मचारी साइलेंट वोटर के रूप में सत्ता को बनाने या मिटाने वाली शक्ति साबित होंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के बैनर तले और श्री शैलेन्द्र कुमार शर्मा की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर में 12,000 से अधिक कर्मचारियों का अभूतपूर्व प्रदर्शन यह साबित कर चुका है कि यह वर्ग पूरी तरह संगठित और जागरूक है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट स्वयं आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण के स्पष्ट निर्देश दे चुका है। ऐसे में सरकार के पास अब कोई बहाना या कानूनी दलील शेष नहीं बची है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा हाई कोर्ट के नियमितीकरण संबंधी आदेश को डबल बेंच में चैलेंज करने का निर्णय आउटसोर्स कर्मियों के साथ विश्वासघात है।
महासंघ इस कदम का कड़ा विरोध करता है और इसे कर्मचारियों से किए गए वादों से पीछे हटने की कार्रवाई बताता है।11 महीनों का अल्टीमेटम — अन्यथा 2027 में राजनीतिक परिणाम भुगतने को तैयार रहे, आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ स्पष्ट रूप से चेतावनी देता है कि:
- आगामी 11 महीनों के भीतर राज्य सरकार नियमितीकरण / विभागीय समायोजन पॉलिसी की औपचारिक घोषणा करके लागू करें ।
- यदि ऐसा नहीं हुआ तो 2027 में: कर्मचारी न कोई धरना देंगे, न कोई प्रदर्शन, न कोई हंगामा, लेकिन एकजुट होकर यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य की किसी भी विधानसभा सीट से कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी विजयी न होने पाए।
- आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ हिमाचल प्रदेश 2027 के चुनाव में हिमाचल को पूर्णतः कांग्रेस-मुक्त बनाने की शपथ लेता है, यदि उनकी वैध मांगें और हाई कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया गया।
- संदेश स्पष्ट है नियमितीकरण लागू करो — या जनता व कर्मचारी 2027 में विकल्प बदल देंगे।

