मेडिकल कॉलेज टांडा में किया गया प्रदेश का पहला सफल ऑर्गन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन

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कांगड़ा- राजीव जसवाल 

दुनिया में सबसे बड़ा दान जीवनदान माना जाता है। किसी भी तरीके से अगर किसी को जीवन दिया जा सके तो उससे बड़ा काम कुछ नहीं हो सकता। साथ ही ध्यान देने वाली बात ये है कि किसी मृत व्यक्ति भी ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अपने अंग दान करके दूसरों को नए जीवन की सौगात दे सकता है।

ऐसा ही कुछ कांगड़ा जिले के टांडा मेडिकल कॉलेज में हुआ । हिमाचल के इतिहास में पहली बार कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन हुआ । इस इतिहास का गवाह टांडा मेडिकल कॉलेज बना जहां रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी की ओर से ऑर्गन रिट्रीवल हुआ।

कांगड़ा जिले का रहने वाला 18 वर्षीय विशाल 10 मार्च को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ। गंभीर अवस्था में उसे टांडा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। हेड इंजरी होने के कारण मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिजनों ने उसे लुधियाना स्थित निजी अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए शिफ्ट करवा दिया।

वहां पर मरीज को डॉक्टरों की टीम ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। मरीज के जीवित ना रहने की निराशा के कारण परिजन उसे वापस टांडा मेडिकल कॉलेज ले आए। अस्पताल में मरीज आईसीयू में दाखिल रहा। आगामी जांच में अस्पताल की विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उसके ब्रेन डेड होने की पुष्टि की।

रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर राकेश चौहान सहित अन्य डॉक्टरों ने परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में बताया। हिम्मत दिखाते हुए मरीज के पिता व अन्य अंगदान करने के लिए राजी हुए।ओर्गन के मैच के लिए ब्लड के सेम्पल फ्लाईट के माध्यम से दोपहर करीब 12.50 बजे धर्मशाला से पीजीआई चंडीगढ़ भेजे गए ।

उन्होंने बताया कि इसी बीच अंग रिट्रीव करने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम टांडा अस्पताल पहुंची पहुंची। शनिवार दोपहर बाद करीब 3:00 बजे रिट्रीवर प्रक्रिया शुरू हुई जोकि करीब 2 से ढाई घन्टे चली ।

इस दौरान मरीज के शरीर से दो किडनी और 2 कॉर्निया निकाले गए। ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से कुछ ही घण्टों के भीतर किडनी से भरे कंटेनर्स को वाहन के जरिए पीजीआई पहुंचाया गया ।

डॉ राकेश ने बताया कि परिजनों की सहमति के बिना अंगदान का यह महान दान संभव ना हो पाता। परिजनों ने समाज के लिए मिसाल कायम करते हुए एक उदाहरण पेश किया है।

उन्होंने बताया कि देशभर में लाखों मरीज अंगना मिलने के कारण मौत के मुंह में चले जाते हैं लेकिन इस युवक के जैसे महादानी ऐसे मरीजों के लिए वरदान साबित होते हैं।

उन्होंने बताया कि दोनों किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पीजीआई भेज दी गई है वही दो कॉर्निया को अस्पताल में 2 जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट किया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान अस्पताल प्रशासन के अलावा एनेस्थीसिया सहित अन्य विभागों के आपसी समन्वय से ऑर्गन रिट्रीवाल सफलतापूर्वक हो सका।

उन्होंने कहा कि सोटो हिमाचल में भी प्रक्रिया को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया। वहीं स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश के नोडल ऑफिसर डॉ पुनीत महाजन ने कहां की टांडा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित अन्य टीम की कड़ी मेहनत के चलते हिमाचल में पहली बार ब्रेन डेड मरीज से अंगदान संभव हुआ है।

पहली बार बना ग्रीन कॉरिडोर

पुलिस प्रशासन के सहयोग से टांडा मेडिकल कॉलेज से लेकर पीजीआई चंडीगढ़ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। टांडा मेडिकल कॉलेज में ऑर्गन रिट्रीवेल के बाद कांगड़ा, उना, रोपड़ मोहाली और चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन के सहयोग से ऑर्गन ले जाने वाले वाहन को प्राथमिकता पर आगे भेजा गया ताकि दान किए गए अंगों को कम से कम समय में पीजीआई पहुंचाया जा सके।

यह रहे मौजूद

पीजीआई की टीम, पीजीआई से एचओडी रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी डॉ आशीष शर्मा, डॉ सर्बप्रीत, डॉ विवेक ठाकुर, डॉ पारुल गुप्ता और नर्सिंग ऑफिसर शीनम मौजूद रही। वही टांडा मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ मोहन सिंह, प्रिंसिपल डॉ भानु अवस्थी, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ अरविंद राणा सहित अन्य डाक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहा।

डॉ राकेश के प्रयासों से शुरू हुआ रेट्रिवल सेंटर

रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ राकेश चौहान की कड़ी मेहनत से टांडा मेडिकल कॉलेज में ओर्गन रेट्रीवल सेंटर शुरू हुआ है। उनके अथक प्रयासों से हिमाचल में पहली बार कैडेवरिक डोनेशन हुआ।

उन्होंने ऑर्गन ट्रांसप्लांट से संबंधित सोटो हिमाचल, रोटो पीजीआई से लगातार संपर्क साधा और मरीज के परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित किया। उनकी मेहनत और लगन के लिए अस्प्ताल प्रशासन सहित पीजीआई की टीम ने उन्हें बधाई दी ।

आभार, 

मीडिया कंसलटेंट, 

स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन हिमाचल प्रदेश

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