मंडी – अजय सूर्या
जनपद के बालीचौकी उपमंडल का गोपाल सिंह आज अपनी हस्तकला से स्वरोजगार की तरफ अग्रसर हुआ है। कभी गोपाल दिहाड़ी लगाकर कारपेंटर का काम करता था। लेकिन जब समय पर दिहाड़ी का पैसा नहीं मिला तो फिर गोपाल ने अपनी कला का इस्तेमाल करते हुए कुछ नया करने की सोची।
गोपाल ने लकड़ी से देवरथों और मंदिरों के मॉडल बनाने का कार्य शुरू किया, जिसे लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है। गोपाल इन मॉडलों को बेचने के लिए शिवरात्रि के मेले में लेकर आया है। यह मॉडल इतने सुंदर हैं कि हर कोई इन्हें खरीदकर अपने घरों की साज सज्जा में इस्तेमाल करना चाहता है।
गोपाल ने बताया कि इस कार्य के लिए उन्होंने 4 अन्य लोगों को भी रोजगार दिया और करीब 2 महीनों के भीतर ही विभिन्न मॉडल तैयार कर दिए।
इन मॉडल में कुल्लू जिला के बंजार में स्थित श्रृंगा ऋषि के मंदिर का मॉडल व गुरू गोबिंद सिंह के समय का मंडी के गुरूद्वारे का पुराना मॉडल भी शामिल है। मंदिर का सबसे छोटा मॉडल 500 रुपये व सबसे बड़ा मॉडल 12 हजार का है।
गोपाल ने बताया कि डीसी मंडी अपूर्व देवगन भी स्टॉल पर पहुंचकर इन मॉडलों की सराहना करने के साथ ही बाबा भूतनाथ, पंचवक्त्र महादेव मंदिर और ऐतिहासिक घंटाघर का मॉडल बनाने का आर्डर भी दे चुके हैं।
इन मॉडल को बनाने के लिए गोपाल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की भी मदद ले रहे हैं। देव काशू स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर ही उन्होंने इंदिरा मार्केट की छत पर यह स्टॉल लगाया है। जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए अन्य उत्पाद भी बेचे जा रहे है।
गोपाल सिंह द्वारा बनाए गए यह मॉडल न केवल हिमाचल वासियों द्वारा पसंद किए जा रहें है, बल्कि अन्य राज्यों के लोग भी इन्हें खरीद रहे हैं। विदेशों में रह रहे हिमाचली भी इन मॉडल को खरीदकर अपने साथ विदेश लेकर जा रहे हैं।
स्टॉल पर पहुंचे नवजोत ने बताया कि यह मॉडल देखने में आकर्षक तो हैं ही, साथ ही इन मॉडल के माध्यम से उन्हें अपनी देव संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा भी मिलती है।
इस स्वरोजगार को अपनाते हुए गोपाल ने न केवल आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की ओर कदम बढ़ाया है, बल्कि वोकल फॉर लोक के नारे को भी सार्थक किया है।

