
जवालामुखी,गुरुदेव राणा
कोरोनाकाल के बीच जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल के मेडिकल स्टाफ का अमानवीय चेहरा सामने आया है, यहां एक गर्भवती महिला को पहले तो उसकी डिलीवरी शाम तक आराम से हो जाएगी यह कहकर 7 घंटे तक अस्पताल में रखा व बाद में एमरजैंसी केस बताकर उन्हें टांडा अस्पताल भेज दिया गया।
मामले को लेकर महिला के परिजनों सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला गौसेवा प्रमुख देशराज भारती ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। साथ ही आरोप लगाया है कि उनकी वजह से एक महिला व उसके बच्चे की जान तक खतरे में आ पहुंची थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोनाकाल के बीच ज्वालामुखी अस्पताल ईलाज के नाम पर सिर्फ लोगों को दर्द दे रहा है। ऐसे में आपातकालीन स्थिति में गरीब आदमी कहां जाए।
दरअसल ये मामला 24 मई का है जब बदोली पंचायत के एक गांव की रहने वाली महिला अनिता पत्नी वीरेंद्र को प्रसव पीड़ा के चलते ज्वालाजी अस्पताल लाया गया। परिजनों का कहना है कि इस बीच अस्पताल में मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक ने उन्हें कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है और महिला की शाम तक डिलीवरी हो जाएगी।
परिजनों का आरोप है कि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा अनीता को यहां दाखिल करवा लिया गया, लेकिन 7 घंटे बीत जाने के बाद यहां पहले मौजूद डाॅक्टर की ड्यूटी खत्म होने के चलते दूसरी शिफ्ट में अस्पताल पहुंचे अन्य डॉक्टर ने एमरजैंसी केस बताकर उन्हें टांडा अस्पताल जाने की सलाह दी।
